ICC WorldCup Special – जब धोनी ने जमाया अपना पहला दोहरा शतक

महेन्द्र सिंह धोनी अपनी अंतरात्मा की आवाज पर भरोसा करने के लिए जाने जाते हैं और ऐसा वह अपने स्कूल के दिनों से करते आए हैं। उन्होंने तब एक बार अपने फिजिकल एजुकेशन के टीचर के खिलाफ एक टूर्नमेंट के फाइनल मैच में पारी की शुरुआत करने को लेकर विद्रोह कर दिया था और जब पारी की शुरुआत की तो नाबाद 213 रन जमाए थे।

फॉर्म से बाहर चल रहे धोनी अपने दिल की आवाज सुनते हुए 2011 के विश्व कप फाइनल मैच में भी बल्लेबाजी क्रम में तीसरे स्थान पर उतरे थे और इसके बाद की कहानी इतिहास बन चुकी है। धोनी ने कई बार तर्क को पीछे छोड़ते हुए अपनी अंतरात्मा की आवाज पर भरोसा किया है जिसे बहुत सारे लोग घबरा जाते हैं लेकिन धोनी की रणनीति हमेशा काम आई है और संभवत: इसी वजह से वह क्रिकेट के खेल के सबसे अच्छे फिनिशर में से एक माने जाते हैं।

इसी तरह की एक घटना का जिक्र धोनी की जीवनी ‘एमएसडी- द मैन, द लीडर’ में किया गया है। इस किताब को पत्रकार विश्वदीप घोष ने लिखा है जिसमें धोनी के रांची के बचपन के दिनों से लेकर भारतीय क्रिकेट की कप्तानी तक के सफर को दर्शाया गया है। धोनी 1997 में डीएवी जवाहर विद्या मंदिर की ओर से अंतर स्कूल प्रतियोगिता के फाइनल में हिनू में स्थित केंद्रीय विद्यालय के खिलाफ खेल रहे थे और पारी की शुरुआत करना चाहते थे लेकिन उनके शिक्षक केशव रंजन बनर्जी बल्लेबाजी क्रम के साथ कोई छेड़छाड़ करना नहीं चाहते थे। लेकिन आखिरकार बनर्जी मान गए और धोनी ने पारी की शुरुआत करते हुए शब्बीर हुसैन (117 नाबाद) के साथ 378 रनों की साझेदारी की थी।

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Abhishek Mourya

ज़िंदगी का हिस्सा है लिखना, सुकून मिलता है. कभी पन्नों पर कभी चेहरों पर, जो पढ़ता हूं लिख देता हूं. अपना काम बस कलम से कमाल करने का हैं

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